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Updates

घर में हरा-भरा तुलसी का पौधा परिवार की पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है। तुलसी पौधे को जल चढ़ाते हुए यह विशेष मंत्र बोला जाए तो समृद्धि का वरदान 1000 गुना बढ़ जाता है। रोग, शोक, बीमारी-व्याधि आदि से छुटकारा मिलता है। 

महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुत...

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पितृ पक्ष श्राद्ध कर्म 2019

13 Sep, 2019 – 28 Sep, 2019

श्राद्ध पक्ष विवरण 2019
13 सितम्बर-( शुक्रवार ) पूर्णिमा श्राद्ध
14 सितम्बर-( शनिवार ) प्रतिपदा ( पड़वा )श्राद्ध
15 सितम्बर ( रविवार ) द्वितीया श्राद्ध
16 सितम्बर ( सोमवार ) विशेष:-आज कोई श्राद्ध नहीं रहेगा।लेकिन जो व्यक्ति दिनॉंक 15 सितम्बर मे द्वितीया तिथि का श्राद्ध नहीं कर पाये वह आज दिनॉं...

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*ॐ त्र्यंबकम् मंत्र* के 33 अक्षर हैं महर्षि वशिष्ठ के अनुसार 33 देवताआं के घोतक हैं।
उन तैंतीस देवताओं 8 वसु 11 रुद्र और 12 आदित्यठ 1 प्रजापति तथा 1 षटकार हैं।
त्रि - ध्रववसु प्राण, सिर
यम - अध्ववरसु , मुख
ब - सोम वसु शक्ति, दक्षिण कर्ण
कम - जल वसु देवता, वाम कर्ण
य - वायु वसु, द...

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पुत्रेष्टि यज्ञ- यह यज्ञ पुत्र प्राप्ति की कामना से किया जाता है। महाराज दशरथ ने यही किया था, परिणामस्वरूप श्रीराम सहित चार पुत्र जन्मे। राजा दशरथ का यह यज्ञ ऋषि ऋष्यशृंग ने संपन्न करवाया था। 
अश्वमेघ यज्ञ- इस यज्ञ का आयोजन चक्रवर्ती सम्राट बनने के उद्देश्य से किया जाता था। इस यज्ञ में एक राजा अप...

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Services

Jyotish in Lucknow ज्योतिष परामर्श केंद्र

  • ASTROLOGICAL CONSULTATION

    ₹501.00
    अगर आपके पास अपनी कुंडली अथवा जन्म समय, तिथि, स्थान नहीं पता है तो आप परिवार में किसी और की कुण्डली के माध्यम से फलादेश/समस्या का निराकरण किया जा सकता है। कभी कभी प्रश्न कुंडली भी बनानी पड़ती है।
  • Love & Relationship Consultation

    ₹501.00
    प्रेम और समर्पण का स्थान जब महात्वाकांक्षाएं ले लेती हैं तब संबंधों में दरार आने लगती है. कभी इसके कारण स्वजनित, तो कभी बाहरियों के दुराग्रह, इर्ष्या जनित होते हैं. कभी कभी यह स्थिति इतनी भयानक हो जाती है की हम अपने साथी पर पूर्ण कब्ज़ा रखना चाहते हैं. जब प्रेम कब्जे में बदल जाता है सामंजस्य और समस्या वही से प्रारंभ होती है. कुछ लोग मेरे पास तंत्र मन्त्र, वशीकरण के माध्यम से अपने प्रेमी और उसके प्रेम को पाने की तीव्र इच्छा रख कर आते हैं. कभी कभी ऐसा भी होता है की बाहरी कारणों की वजह से या तंत्रों की चपेट में आने से आपस का प्रेम लुप्त हो जाता है और कोई व्यक्ति हमें अकारण ही छोड़ कर चला जाता है हमारे अहंकार को ज़बरदस्त ठेंस पहुचती है और हम अपने साथी को पुनः पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तत्पर हो जाते हैं. संबंधों में सहयोग और विश्वाश बनाये रखें माँ भगवती कल्याण करेंगी.
  • Business Consultancy

    ₹501.00
    बिज़नेस के बहुत सारे उतार चढ़ावों के बीच हम समझ ही नहीं पाते कि हमारा व्यवसाय अचानक चलते चलते बंद क्यों पड़ गया अथवा नुकसान क्यों होता जा रहा है| व्यवसाय को आगे बढ़ने के लिए हमारी ग्रह दशाएं भी अहम् भूमिका निभाती हैं| कभी कभी की कुछ वाह्य कारणों से भी स्थाइत्व की गति में बाधा पहुचती है| समय समय पे विशेष दशाओं के आने पर कुछ विशेष पूजन करने से बिज़नेस निर्बाध तरक्की की ओर बढ़ जाता है| समय है इसे पहचानने और सही सलाह लेने की|
  • Education and professional Consultancy नौकरी एवं शिक्षा में ज्योत्षीय सलाह

    ₹501.00
    हमारे भविष्य को सवारने में हमारे लग्न, ग्रह और गोचर हमें विशेष बल प्रदान करते हैं | सही दिशा में आगे बढ़ने पर हम बहुत ही ऊंचाई पर पहुच सकते हैं वही सही जानकारी और सलाह के बिना हम किंकर्तव्यविमूढ़ बन कर कुछ भी कर पाने में असमर्थ भी हो सकते हैं. शिक्षा और नौकरी प्रारंभ करने के लिए विशेष सलाह लें और भविष्य को सुरक्षित बनाएं |

BIRTH CHART PREDICATION, QUARRIES & QUESTIONS कुण्डली फलादेश

  • PER KUNDLI CONSULTATION (प्रति कुण्डली परामर्श ),

    ₹501.00
    आप अपने प्रश्न एवं जिज्ञाशाओं का समाधान ऑनलाइन अथवा व्यक्तिगत रूप से प्राप्त कर सकते हैं.
  • Hawan Pujan & Anushthan (हवन पूजन एवं अनुष्ठान )

    समस्त प्रकार के हवं, पूजन, अनुष्ठान एवं धार्मिक कर्मकांड विशिष्ट वैदिक पुरोहितों द्वारा संपन्न करवाया जाता है.
  • Per Question Consultation (प्रति प्रश्न परामर्श)

    ₹0.00
    ऑनलाइन अथवा whatsapp के माध्यम से अपना प्रथम प्रश्न निशुल्क पूछ सकते हैं

रत्न Gemstone

  • माणिक (RUBY) प्रति रत्ती

    माणिक बहुत चमकदार गहरे लाल रंग से गुलाबी रंग तक होता है। गहरा लाल रंग होने के बाद भी यह रत्‍न ट्रांस्‍पेरेंट होता है। ऐसा कहा जाता है कि इसे हाथ में लेकर रखने से गर्मी का एहसास होने लगता है। माणिक्‍य सूर्य का रत्‍न है। इसको धारण करने के संबंध में कुंडली में सूर्य की स्‍थ‍िति को देखा जाता है। बेहतर होता है कि किसी जानकार ज्‍योतिषाचार्य की सलाह लेने के बाद ही माणिक्‍य धारण करें किन्‍तु यहां कुंडली में सूर्य की उपस्थिति के अनुसार माणिक्‍य धारण करने के विषय में सामान्‍य बिन्‍दु प्रस्‍तुत किए जा रहे हैं।पांचवें भाव में सूर्य हो तो अत्‍यधिक लाभ व उन्‍नति के लिए माणिक्‍य पहनना चाहिए।यदि सूर्य भाग्‍येश और धनेश होकर छठे अथवा आठवें स्‍थान पर हो तो माणिक्‍य धारण करना लाभ देता है।यदि सूर्य सप्‍तम भाव में हो तो वह स्‍वास्‍थ्‍य संबंधि परेशानियां देता है। ऐसे लोग माणिक्‍य पहनकर स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार महसूस करते हैं।सूर्य अष्‍टमेश या षष्‍ठेश हो कर पाचवें अथवा नवे भाव में बैठा हो तो जातक को माणिक्‍य धारण करना चाहिए।
  • मूंगा (Coral) रत्न

    वैदिक ज्योतिष के अनुसार मुंगा रत्न मंगल ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है! अदि आप में साहस की कमी और शत्रुओं से सामना करने की हिम्मत नहीं है तो इसमें मुंगा आपकी सहायता कर सकता है क्योकि इसके पहने से हमारे मनको बल प्राप्त होता है और फल स्वरूप हमारे भीतर निडरता आ जाती है और शत्रुओं का सामना करने की हिम्मत आ जाती है ! जिन बच्चों में आत्मविश्वास की कमी और दब्बूपन मोजूद होता है उन्हें मुंगा अवश्य धारण करना चाहिए |यदि आप मंगल देव के रत्न, मुंगे को धारण करना चाहते है, तो 5 से 8 कैरेट के मुंगे को स्वर्ण या ताम्बे की अंगूठी में जड्वाकर किसी भी शुक्ल पक्ष के किसी भी मंगलवार को सूर्य उदय होने के पश्चात् इसकी प्राण प्रतिष्ठा करे!
  • मोती (PEARL ) रत्न

    मोती चन्द्र ग्रह का रत्न है। मोती को अंग्रेज़ी में 'पर्ल' कहते हैं। यह रत्न सब ग्रहों की माता माने जाने वाले ग्रह चन्द्रमा को बलवान बनाने के लिए पहना जाता है। मोती हल्के सफेद से लेकर हल्का पीला, हल्का नीला, हल्का गुलाबी, काला, आसमानी, लाल अथवा हल्का काला आदि कई रंगों में पाया जाता है। मोती समुद्र से सीपों के मुंह से प्राप्त होता है। मोती एक बहुमूल्य रत्न जो छूटा, गोल तथा सफ़ेद होता है। मोती को उर्दू में मरवारीद और संस्कृत में मुक्ता कहते हैं। ज्योतिष लाभ की दृष्टि से इनमें से सफेद रंग उत्तम होता है तथा उसके पश्चात हल्का नीला तथा हल्का नीला रंग भी माननीय है। धारक के लिए शुभ होने की स्थिति में यह उसे मानसिक शांति प्रदान करता है तथा विभिन्न प्रकार की सुख सुविधाएं भी प्रदान कर सकता है। मोती को आमतौर पर दायें हाथ की अनामिका या कनिष्का उंगली में धारण किया जाता है। इसे सोमवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण करना चाहिए।
  • पन्ना Emerald

    पन्ना बुध ग्रह का रत्न है। पन्ना को अंग्रेज़ी में 'एमेराल्ड' कहते हैं। यह रत्न बुध ग्रह को बल प्रदान करने के लिए पहना जाता है। पन्ना हल्के हरे रंग से लेकर गहरे हरे रंग तक में कई रंगों में पाया जाता है। यह हरा रंग लिए सफ़ेद लोचदार या नीम की पत्ती जैसे रंग का पारदर्शक होता है। नवरत्न में पन्ना भी होता है। हरे रंग का पन्ना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। पन्ना अत्यंत नरम पत्थर होता है तथा अत्यंत मूल्यवान पत्थरों में से एक है। रंग, रूप, चमक, वजन, पारदर्शिता के अनुसार इसका मूल्य निर्धारित होता है। धारक के लिए शुभ होने पर यह उसे अच्छी वाणी, व्यापार, अच्छी सेहत, धन-धान्य तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान कर सकता है। इस रत्न को आमतौर पर दायें हाथ की अनामिका उंगली में बुधवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण किया जाता है।
  • पुखराज Topaz

    पुखराज गुरु ग्रह का रत्न है। पुखराज को अंग्रेज़ी में 'टोपाज' कह जाता हैं। पुखराज एक मूल्यवान रत्न है। पुखराज रत्न सभी रत्नों का राजा है। यह रत्न समस्त ग्रहों के गुरु माने जाने वाले बृहस्पति को बल प्रदान करने के लिए पहना जाता है। इसका रंग हल्के पीले से लेकर सफ़ेद, तथा नीले रंगों का होता है। वैसे कहावत है कि फूलों के जितने रंग होते हैं, पुखराज भी उतने ही रंग के पाए जाते हैं। पुखराज रत्न एल्युमिनियम और फ्लोरीन सहित सिलिकेट खनिज होता है। संस्कृत भाषा में पुखराज को पुष्पराग कहा जाता है। अमलतास के फूलों की तरह पीले रंग का पुखराज सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। धारक के लिए शुभ होने की स्थिति में यह उसे धन, विद्या, समृद्धि, अच्छा स्वास्थय तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान कर सकता है। इस रत्न को आम तौर पर दायें हाथ की तर्जनी उंगली में गुरुवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण किया जाता है।
  • हीरा DIAMOND

    हीरा शुक्र ग्रह का रत्न है। अंग्रेज़ी में हीरा को 'डायमंड' कहते हैं। यह रत्न शुक्र को बलवान बनाने के लिए धारण किया जाता है। हीरा एक प्रकार का बहुमूल्य रत्न है जो बहुत चमकदार और बहुत कठोर होता है। यह भी कई रंगों में पाया जाता है, जैसे- सफ़ेद, पीला, गुलाबी, नीला, लाल, काला आदि। इसे नौ रत्नों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। हीरा रत्न अत्यन्त महंगा व दिखने में सुन्दर होता है। हीरे को हीरे के कणों के द्वारा पॉलिश करके ख़ूबसूरत बनाया जाता है। धारक के लिए शुभ होने पर यह उसे सांसरिक सुख-सुविधा, ऐशवर्य, मानसिक प्रसन्नता तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान कर सकता है। इन रत्नों को आम तौर पर दायें हाथ की मध्यामा उंगली में शुक्रवार की सुबह स्नान करने के बाद धारण किया जाता है।
  • नीलम Sapphire

    नीलम शनि ग्रह का रत्न है। नीलम का अंग्रेज़ी नाम 'सैफायर' है। शनि महाराज का यह रत्न नवग्रहों के समस्त रत्नों में सबसे अनोखा है। नीलम रत्न गहरे नीले और हल्के नीले रंग का होता है। यह ओर भी कई रंगों में पाया जाता है; मसलन- मोर की गर्दन जैसा, हल्का नीला, पीला आदि। मोर की गर्दन जैसे रंग वाला नीलम उत्तम श्रेणी का माना जाता है। नीलम पारदर्शी, चमकदार और लोचदार रत्न है। नवरत्न में नीलम भी होता है। शनि का रत्न नीलम एल्यूमीनियम और ऑक्सीजन के मेल से बनता है। इसे कुरुंदम समूह का रत्न माना जाता है। धारक के लिए शुभ होने की स्थिती में यह उसे धन, सुख, समृद्धि, नौकर-चाकर, व्यापरिक सफलता तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान कर सकता है किन्तु धारक के लिए शुभ न होने की स्थिती में यह धारक का बहुत नुकसान भी कर सकता है। इसलिए इस रत्न को किसी अच्छे ज्योतिषि के परामर्श के बिना बिल्कुल भी धारण नहीं करना चाहिए। इस रत्न को आम तौर पर दायें हाध की मध्यमा उंगली में शनिवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण किया जाता है।
  • गोमेद Onyx

    गोमेद राहु ग्रह का रत्न है। गोमेद का अंग्रेज़ी नाम 'जिरकॉन' है। यह रत्न राहु महाराज को बल प्रदान करने के लिए पहना जाता है। इसका रंग हल्के शहद रंग से लेकर गहरे शहद रंग तक होता है। सामान्यतः इसका रंग लाल धुएं के समान होता है। रक्त-श्याम और पीत आभायुक्त कत्थई रंग का गोमेद उत्त्म माना जाता है। नवरत्न में गोमेद भी होता है। गोमेद रत्न पारदर्शक होता है। गोमेद को संस्कृत में गोमेदक कहते हैं। धारक के लिए शुभ होने की स्थिति में यह उसे अक्समात ही कही से धन अथवा अन्य लाभ प्रदान कर सकता है। किन्तु धारक के लिए अशुभ होने की स्थिति में यह रत्न उसका बहुत अधिक नुकसान कर सकता है और धारक को अल्सर, कैंसर तथा अन्य कई प्रकार की बीमारियां भी प्रदान कर सकता है। इसलिए इस रत्न को किसी अच्छे ज्योतिष के परामर्श के बिना बिल्कुल भी धारण नहीं करना चाहिए। इस रत्न को आमतौर पर दायें हाथ की मध्यमा अथवा अनामिका उंगली में शनिवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण किया जाता है।
  • लहसुनियाँ CATS EYE

    लहसुनिया केतु ग्रह का रत्न है। यह रत्न केतु महाराज को बल प्रदान करने के लिए पहना जाता है। लहसुनिया रत्न में बिल्लीम की आँख की तरह का सूत होता है। इसमें पीलापन, स्याही या सफ़ेदी रंग की झाईं भी होती है। लहसुनिया रत्न को वैदूर्य भी कहा जाता है। धारक के लिए शुभ होने पर यह उसे व्यसायिक सफलता, आध्यातम प्रदान करता है।

उपरत्न STONES

  • उपरत्नों की सूची

    सुनहला (Citrine)कटैला (Amethyst)स्फटिक (Rock Crystal)दाना फिरंग (Malachite)फिरोजा (Turquoise)जबरजद्द (Peridot)तुरमली (Tourmaline) ओपल (Opal)संगसितारा (Gold Stone)जरकन (Zircon)माहेमरियम (Fortification Agate)लाजवर्त (Lapis Lazuli)तामड़ा (Garnet)चंद्रकांतमणि (Moon Stone)गनमेटल (Hematite)मकनातीस (Load Stone)काला स्टार (Malanite)टाइगर (Tiger Eye ) मरगज (Jade, Jadeite)ओनेक्स (Onyx) हकीक (Agate)सुलेमानी (Sulemani Onyx)हकीक यमनी (Sardonyx)बैरुज (Aquamarine)धुनैला (Smoky Quartz)सजरी (Moss Agate)होलदिली (Heliodor) अलेक्जैंडर (Alexandrite)लालडी (Spinel Ruby)रोमनी (Romni)नरम (Spinel)लूधिया (A Kind of Marbel)सिंदूरिया (Pink Sapphire)नीली (Sodalite)पितौनिया (Blood Stone)बासी (Bamboo Stone)दूरे नज़फ (Door E Nazaf )आलेमासी (A Kind of Agate)जजेमानी (A Variety of Onyx)सीवार (Sivar)तुरसावा (A Kind of Zircon)अहबा (Rhodonite)आबरी (Abri)कुदरत (Kudrat)चित्ती (Chatoyant)संगसन (White Jade)लारू (A Kind of Marble)मार्बल (Marble)कसौटी (Basanite)दारेचना (Braunit

कर्मकाण्ड, पूजन एवं अनुष्ठान

  • संस्कार

    संस्कार शब्द का मूल अर्थ है, 'शुद्धीकरण'। मूलतः संस्कार का अभिप्राय उन धार्मिक कृत्यों से है जो किसी व्यक्ति को अपने समुदाय का पूर्ण रुप से योग्य सदस्य बनाने के उद्देश्य से उसके शरीर, मन और मस्तिष्क को पवित्र करने के लिए किए जाते हैं, किन्तु हिंदू संस्कारों का उद्देश्य व्यक्ति में अभीष्ट गुणों को जन्म देना भी है। प्राचीन भारत में संस्कारों का मनुष्य के जीवन में विशेष महत्व है। संस्कारों के द्वारा मनुष्य अपनी सहज प्रवृतियों का पूर्ण विकास करके अपना और समाज दोनों का कल्याण करता है। ये संस्कार इस जीवन में ही मनुष्य को पवित्र नहीं करते हैं, उसके पारलौकिक जीवन को भी पवित्र बनाते हैं। प्रत्येक संस्कार से पूर्व होम किया जाता है, किंतु व्यक्ति जिस गृह्यसूत्र का अनुकरण करता हो, उसी के अनुसार आहुतियों की संख्या, हव्यपदार्थों और मन्त्रों के प्रयोग में अलग-अलग परिवारों में भिन्नता होती है।

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